
An emotional patriotic anthem for every Indian living far from home — the feet may not touch Indian soil, but every prayer still carries its name. The tricolour held high, the promise kept until the last breath.
Written by Dr Abhishek Srivastava
तेरी ज़मीं पे क़दम नहीं मेरे तो क्या हुआ, तेरे ही नाम से जुड़ी है मेरी हर दुआ। वतन, वतन, वतन मेरे वतन। वतन, वतन, वतन मेरे वतन।
क्या हुआ जो, तेरे घोंसले से, दूर आया ये परिंदा है, मिट्टी की ख़ुशबू, आज भी मेरी साँसों में ज़िंदा है। वतन, वतन, वतन मेरे वतन।
बेइंतेहाँ, बेहिसाब, मुहब्बत मैं करता हूँ, हाथों में तिरंगा लिए, तेरी इबादत मैं करता हूँ। वतन, वतन, वतन मेरे वतन।
ज़िंदगी का मक़सद मेरी तेरे ही काम आना है, आख़िरी साँस तक, जुबां पे तेरा ही नाम आना है। वतन, वतन, वतन मेरे वतन।
तेरी ज़मीं पे क़दम नहीं मेरे तो क्या हुआ, तेरे ही नाम से जुड़ी है मेरी हर दुआ। ऐ वतन… ऐ वतन… ऐ वतन…