
A soulful ballad exploring the depths of unconventional love — a love that lives beyond textbook definitions.
Written by Dr Abhishek Srivastava
नहीं है आशिक़ी मेरी किताबी नहीं है ये चाहत मेरी बेवजह की
सिफ़ारिशें कर रही है मेरी, ये हवा, ये बारिश, ये शोख़ियाँ फ़िज़ा की। समझाना है, यक़ीन दिलाना है उसको, ज़रूरत है इसलिए मुझे हर दुआ की। नहीं है ये चाहत मेरी बेवजह की, नहीं है आशिक़ी मेरी किताबी।
है शायरी मेरी वो, जुस्तजू है मेरी, मेरे साँसों की बेचैनी, वो आरज़ू है मेरी। वो लगती है मुझे, जीने की हर वजह सी, नहीं है ये चाहत मेरी बेवजह की।
सजदे करूँ, वो बन जाए गर मेरा ख़ुदाया, साँसों में नाम होगा, धड़कनों में उसका साया, देगा मिसालें ये ज़माना… मेरी वफ़ा की। नहीं है आशिक़ी मेरी किताबी।