
A poetic romantic qawwali blending deep lyrics, dramatic music, and soul-stirring emotion.
Written by Dr Abhishek Srivastava
ऐ दिलरुबा, क्या चीज़ है तू दिलरुबा ऐ दिलरुबा, क्या चीज़ है तू दिलरुबा
तेरी आँखों की, नशीली सी चुभन, तेरी साँसों की, गुलाबी सी छुअन, तोहफ़े दे जाती है, ख़्वाबों को मेरे, महका के मेरा दिल, और ये बदन। ऐ दिलरुबा, क्या चीज़ है तू दिलरुबा
तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँ उलझा हूँ, बस क़ैद हूँ तेरे ही ख़यालों में, जवाब ढूँढता हूँ मैं तुझमें ही हरदम, खोया भी हूँ तेरे ही सवालों में। ऐ दिलरुबा, क्या चीज़ है तू दिलरुबा
तेरे सिवा कुछ याद रहता नहीं, दिल-ए-कम्बख़्त कुछ भी सुनता नहीं, धड़कनों को जैसे बाँध रक्खा है, तेरे हुस्न के दिलकश तालों ने। मय समझ के मैं पी जाऊँगा, अब तो ज़हर भी तेरे होंठों के प्यालों में। ऐ दिलरुबा, क्या चीज़ है तू दिलरुबा